ठुड्डी पर लगातार लार, मुँह में ठुँसी हुई मुट्ठी, और एक शाम जो बिना वजह बहुत चिड़चिड़ी निकली। बच्चों के दांत निकलने के लक्षण हर घर में कभी न कभी दिखते हैं, और दादी-नानी के पास इसके बारे में ढेरों बातें होती हैं। पर दांत शायद ही कभी "समय पर" आते हैं: पहला दांत 3 से 14 महीने के बीच कभी भी निकल सकता है, और असली लक्षण अक्सर उतने नाटकीय नहीं होते जितना सुना था। इस गाइड में जानिए कि असल में क्या होता है, दांत किस क्रम में आते हैं, क्या सच में मदद करता है और किन चीज़ों से दूर रहना चाहिए।
यह इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य जानकारी है, डॉक्टर द्वारा नहीं लिखी गई है और व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अलग-अलग देशों की सलाह भिन्न हो सकती है; अपने बच्चे के बारे में डॉक्टर से बात करें।
यह लेख बाल-चिकित्सा और बच्चों के दांतों के आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी है। अपने बच्चे के लिए हमेशा अपने बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह मानें।
बच्चे के दांत कब और किस क्रम में निकलते हैं?
ज़्यादातर बच्चों का पहला दांत 6 से 10 महीने के बीच आता है, पर सामान्य दायरा काफ़ी बड़ा है। लगभग 3 साल की उम्र तक ज़्यादातर बच्चों के सभी 20 दूध के दांत आ जाते हैं। सही समय हर बच्चे में अलग होता है, लेकिन क्रम लगभग एक जैसा रहता है:
| दांत | आम उम्र |
|---|---|
| नीचे के बीच वाले दो आगे के दांत | 6–10 महीने |
| ऊपर के बीच वाले दो आगे के दांत | 8–12 महीने |
| ऊपर के बगल वाले आगे के दांत | 9–13 महीने |
| नीचे के बगल वाले आगे के दांत | 10–16 महीने |
| पहली दाढ़ें | 13–19 महीने |
| कुकुर दंत (नुकीले दांत) | 16–22 महीने |
| दूसरी दाढ़ें | 23–33 महीने |
नीचे के दांत लगभग हमेशा ऊपर वालों से पहले आते हैं। हर दांत के साथ कुछ दिनों के लिए लक्षण दिखते हैं: आमतौर पर दांत निकलने से कुछ दिन पहले शुरू होकर, मसूड़ा फटते ही कम हो जाते हैं। एक दांत का यह "दौर" अक्सर 3 से 8 दिन चलता है, हालाँकि कुछ बच्चे बहुत परेशान होते हैं और कुछ को पता भी नहीं चलता। कभी-कभी दो दांत एक साथ आते हैं, तो दौर थोड़ा लंबा लग सकता है।
दांत निकलने के असली लक्षण
ये संकेत सच में आते हुए दांत से जुड़े हैं:
- ज़्यादा लार टपकना: अक्सर सबसे पहला और भरोसेमंद संकेत। ठुड्डी और गले पर हल्के दाने भी हो सकते हैं, इसलिए लार को मुलायम कपड़े से पोंछते रहें।
- हर चीज़ चबाना: हाथ, खिलौने, कपड़े का कोना, जो भी हाथ लगे।
- मसूड़ों का सूजा, लाल या नाज़ुक होना, ठीक उस जगह जहाँ दांत आ रहा है।
- हल्का चिड़चिड़ापन, सामान्य से थोड़ा ज़्यादा रोना-धोना।
- नींद में ख़लल: झपकियाँ या रात की नींद टूटना, ख़ासकर दांत निकलने से पहले की एक-दो रातें।
- दूध पीने में कम मन, अगर दुखते मसूड़ों से चूसना या चबाना तकलीफ़ देता हो।
"दांत निकल रहे हैं, इसलिए दस्त हैं": यह भ्रम छोड़ दें। हमारे यहाँ यह बात बहुत आम है, लेकिन दांत निकलने से असली बुखार, दस्त या उल्टी नहीं होते। शोध में दांत निकलने के आसपास तापमान में सिर्फ़ बहुत हल्की, थोड़ी देर की बढ़त दिखती है, असली बुखार जैसा कुछ नहीं। इस उम्र में बच्चा हर चीज़ मुँह में डालता है, इसलिए दस्त अक्सर किसी संक्रमण से होते हैं। अगर बच्चे को 38 °C या उससे ज़्यादा बुखार है, या दस्त-उल्टी है, तो इसे "बस दांत" मानकर इंतज़ार न करें: बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें, और दस्त में ORS डॉक्टर के बताए अनुसार दें। 3 महीने से छोटे बच्चे को 38 °C या ज़्यादा बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।
दांत निकलते समय क्या सच में मदद करता है
आसान और कम जोखिम वाले उपाय सबसे अच्छे काम करते हैं:
- ठंडा (जमाया नहीं) टीथिंग रिंग: फ़्रिज में रखा मज़बूत सिलिकॉन रिंग मसूड़ों को आराम देता है। फ़्रीज़र में पूरी तरह जमा रिंग बहुत सख़्त हो सकता है और मसूड़ों को चोट पहुँचा सकता है।
- साफ़, ठंडा, गीला कपड़ा चबाने को: हमेशा हाथ में रहने वाला आसान उपाय।
- मसूड़ों की हल्की मालिश: अच्छी तरह धोई उंगली से एक-दो मिनट मसूड़े पर हल्का दबाव।
- ज़्यादा गोद और थोड़ा ज़्यादा धीरज: मुश्किल दिन में आपका साथ किसी भी चीज़ जितना ही असर करता है।
- ज़रूरत हो तो उम्र के हिसाब से दर्द की दवा: अगर रात सच में बहुत तकलीफ़ वाली हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या फ़ार्मासिस्ट से बच्चे की उम्र और वज़न के हिसाब से पैरासिटामॉल या आइबुप्रोफ़ेन की सही खुराक पूछें। अपने अंदाज़े से या बड़ों की दवा तोड़कर कभी न दें।
अगर बच्चा 6 महीने से बड़ा है और ठोस आहार शुरू हो चुका है, तो ठंडी खीरे या गाजर की मोटी, बड़ी फाँक आपकी नज़र के सामने चबाने को दी जा सकती है; छोटे या सख़्त टुकड़ों से गला अटकने का ख़तरा रहता है, इसलिए बच्चे को अकेला न छोड़ें। ठोस आहार की शुरुआत के बारे में शिशु को ठोस आहार कब शुरू करें लेख पढ़ें।
दांत निकलने का नींद और दूध पर असर
माँ-बाप सबसे ज़्यादा दो चीज़ें महसूस करते हैं: बेचैन रातें और चिड़चिड़ी फीड। सूजे, दुखते मसूड़ों से स्तन या बोतल चूसना थोड़ी देर के लिए असहज हो सकता है, इसलिए दांत निकलते समय बच्चे का कम देर तक पीना, बार-बार छोड़ देना या पसंदीदा खाने में कुछ दिन कम मन दिखाना आम है। यह आमतौर पर दांत निकलते ही ठीक हो जाता है और इतना लंबा नहीं चलता कि वज़न पर असर पड़े। रात में जागना भी उतना ही आम है: जब बच्चा लेटा होता है और दिन जैसी हलचल नहीं होती, तो दर्द ज़्यादा महसूस होता है, इसलिए दांत वाली रातें दांत वाले दिनों से ज़्यादा भारी लगती हैं। दांत के दौर में कुछ दिन ज़्यादा बार जागना सामान्य है, और यह स्लीप रिग्रेशन नहीं है, भले ही बाहर से दोनों एक जैसे दिखें। रात की नींद के बाक़ी कारणों के लिए बच्चा रात में क्यों नहीं सोता पढ़ें।
किन चीज़ों से बचें
कुछ प्रचलित उपायों में असली ख़तरा है, इन्हें पूरी तरह छोड़ दें:
- बेंज़ोकेन या लिडोकेन वाले सुन्न करने वाले जेल और लिक्विड: अमेरिका के FDA समेत नियामकों ने चेतावनी दी है कि ये शिशुओं और छोटे बच्चों में ख़ून की एक दुर्लभ पर गंभीर समस्या (मेथेमोग्लोबिनेमिया) कर सकते हैं। ये शिशुओं के लिए अनुशंसित नहीं हैं। कोई भी जेल ख़रीदने से पहले लेबल पढ़ें और डॉक्टर से पूछें।
- गले या कलाई में टीथिंग नेकलेस, अंबर की माला या कोई भी धागा-माला: इनसे दम घुटने और गला कसने का असली ख़तरा है, और दर्द में राहत का कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। सोते समय बच्चे के गले में कुछ भी न बाँधें।
- बेलाडोना वाली होम्योपैथिक टीथिंग गोलियाँ या जेल: कुछ उत्पादों पर सामग्री की मात्रा असमान और असुरक्षित होने के कारण सुरक्षा चेतावनियाँ और रिकॉल हो चुके हैं।
- मसूड़ों पर शहद, लौंग का तेल या घरेलू लेप: 1 साल से छोटे बच्चे को शहद किसी भी रूप में न दें, और मसूड़ों पर कोई तेज़ चीज़ डॉक्टर से पूछे बिना न लगाएँ।
बेचैन रातें, फीड और ग्रोथ, एक जगह
Trackeron में नींद, स्तनपान (तरफ़ और समय), बोतल (ml) और डायपर एक टैप में दर्ज होते हैं, और चार्ट में साफ़ दिखता है कि दांत के दौर में नींद या फीड कितनी बदली और कब सामान्य हुई। ग्रोथ WHO पर्सेंटाइल चार्ट पर दिखती है। Premium की रियल-टाइम फ़ैमिली शेयरिंग से पापा या दादी-नानी भी आज रात का पूरा हाल तुरंत देख सकते हैं, दोबारा समझाने की ज़रूरत नहीं। ऐप डाउनलोड करना और बुनियादी इस्तेमाल मुफ़्त है।
दांत निकलना या ग्रोथ स्पर्ट?
दोनों से नींद और भूख बिगड़ सकती है, इसलिए फ़र्क़ करना मुश्किल होता है। कुछ दिन का रिकॉर्ड अक्सर तस्वीर साफ़ कर देता है: लार और सूजे मसूड़े दांत की ओर इशारा करते हैं, जबकि अचानक बढ़ी भूख और बार-बार फीड ग्रोथ स्पर्ट की ओर। एक बेबी ट्रैकर ऐप में नींद और फीड दर्ज करते रहें तो यह भी दिखता है कि बदलाव कब शुरू हुआ और कब ख़त्म, जो डॉक्टर के लिए भी काम की जानकारी है। क्या-क्या दर्ज करें, यह हमारी बेबी डायरी गाइड में है। इसी उम्र में बच्चा बैठना और घुटनों के बल चलना भी सीख रहा होता है; उसके पड़ाव बच्चा कब बैठता और चलता है लेख में हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ को कब दिखाएँ
- बच्चे को असली बुखार (38 °C या ज़्यादा) हो; 3 महीने से छोटे बच्चे में तुरंत।
- दस्त, उल्टी या पानी की कमी के संकेत (बहुत कम गीले डायपर, मुँह सूखा, बच्चा सुस्त)।
- बच्चा लंबे समय तक दूध या पानी लेने से मना करे।
- बच्चा सिर्फ़ चिड़चिड़ा नहीं, बल्कि सच में बीमार लगे।
- लगभग 18 महीने तक एक भी दांत न आया हो।
- मसूड़े पर ज़्यादा सूजन, मवाद, या दांत टूटा या काला दिखे।
टीकाकरण और नियमित जाँच के समय बच्चे का MCP कार्ड साथ रखें, और वहीं दांतों के बारे में भी पूछ लें।
सार यह है: दांत निकलना तकलीफ़ वाला है पर शायद ही कभी गंभीर। दांत लगभग तय क्रम में आते हैं, और आसान, सुरक्षित उपाय अच्छे से काम करते हैं। भ्रमों की जगह असली लक्षणों पर ध्यान दें, तो आपको पता रहेगा कि कब बस दांत है और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बच्चों के दांत निकलने के लक्षण क्या हैं?
सबसे आम लक्षण हैं: ज़्यादा लार टपकना, हाथ या खिलौने चबाना, जहाँ दांत आ रहा है वहाँ मसूड़े का सूजा, लाल या नाज़ुक होना, सामान्य से ज़्यादा चिड़चिड़ापन, नींद में ख़लल और कुछ दिन दूध पीने में कम मन। ये लक्षण आमतौर पर दांत निकलने से कुछ दिन पहले शुरू होते हैं और दांत बाहर आते ही कम हो जाते हैं।
बच्चे का पहला दांत कब निकलता है?
ज़्यादातर बच्चों का पहला दांत 6 से 10 महीने के बीच आता है, आमतौर पर नीचे के आगे वाले दो दांत। पर सामान्य दायरा बड़ा है: कुछ बच्चों का पहला दांत 3–4 महीने में और कुछ का 12–14 महीने में आता है। लगभग 3 साल तक सभी 20 दूध के दांत आ जाते हैं। अगर 18 महीने तक एक भी दांत न आए, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
क्या दांत निकलते समय दस्त और बुखार होना सामान्य है?
नहीं। दांत निकलने से तापमान बहुत हल्का-सा बढ़ सकता है, पर असली बुखार (38 °C या ज़्यादा), दस्त या उल्टी दांतों की वजह से नहीं होते। ऐसे लक्षणों को "दांत निकल रहे हैं" मानकर टालें नहीं: इन्हें बीमारी का संकेत मानें और बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें। दस्त में ORS डॉक्टर की सलाह से दें। 3 महीने से छोटे बच्चे को 38 °C या ज़्यादा बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।
दांत निकलते समय दर्द में क्या दे सकते हैं?
सबसे पहले आसान उपाय आज़माएँ: फ़्रिज में ठंडा किया (जमाया नहीं) टीथिंग रिंग, साफ़ ठंडा गीला कपड़ा चबाने को, और साफ़ उंगली से मसूड़ों की हल्की मालिश। अगर रात सच में बहुत तकलीफ़ वाली हो, तो पैरासिटामॉल या आइबुप्रोफ़ेन सिर्फ़ बाल रोग विशेषज्ञ या फ़ार्मासिस्ट की बताई खुराक में दें, जो बच्चे की उम्र और वज़न पर निर्भर करती है। बेंज़ोकेन या लिडोकेन वाले जेल, शहद और लौंग का तेल न लगाएँ।
बच्चे के दांतों में ब्रश कब से करें?
पहला दांत आते ही। मुलायम, छोटे बेबी टूथब्रश पर चावल के दाने जितना फ़्लोराइड टूथपेस्ट लगाकर दिन में दो बार ब्रश करें। उससे पहले मसूड़ों को साफ़, गीले कपड़े से पोंछ सकते हैं।